Tuesday, February 24, 2009

वही जंग ज़िन्दगी में हरबार है

वही सफर और वही किरदार है

खुबसूरत तस्वीर और रंग बेहतरीन है

एक रोटी और ढेरो हकदार है

मेरे मुल्क में सब गद्दार

यहाँ सिर्फ गरीबी वफादार है

जो लड़ा सच से, सच के लिए

वो गाँधी भी आज शर्मसार है

राजनीती अच्छा खेल है

लेकिन यही खंडहर दीवार है

Thursday, December 25, 2008

बेसबब बिखरती ज़िंदगी,

और बदलते लिबास ज़िंदगी,

कोरे है काग़ज़ जिसके,

ऐसी एक किताब ज़िंदगी,

रिश्तो पे जमी बर्फ,

और फटी लिहाफ़* ज़िंदगी,

कांटो की तरह चुभे है,

मंज़र के निशान ज़िंदगी,

बद्तर हालत मगर हम बेबाक,

यही है मिज़ाज़ ज़िंदगी,

बेहतर है,उम्दा है उनसे,

लहज़े में मिठास ज़िंदगी,

घर से बिखरने की पीड़ा,

एक कड़वा अहसास ज़िंदगी,

अक्सर टूटता हूँ जुदा होकर,

जैसै टूटे तारों का सितार ज़िंदगी।

*लिहाफ़= रज़ाई

Friday, December 12, 2008

दर्द

प्यार तो हर कोई करता है,

मगर उसको जताना चाहिए,

गम मेरा हो या तेरा हो मेरे यार,

उसे मिलकर बाँटना चाहिए,

दर्द आंखों से नज़र आ जाता है,

मगर कुछ को अंदर ही छुपाना चाहिए,

जो आंखे बहुत रोती हैं खुशी में भी,

उन आँखों को भी हसाना चाहिए.

Tuesday, September 30, 2008

ईमान

खाली न हो घर दिल का,

इसमे सामान कोई रखना,

जो चले गये छोड़कर सफ़र,

उनकी याद में याद कोई रखना,

जब हो कामयाबी का नशा खुद पर,

तो सामने अपने आईना कोई रखना,

यकीनन ज़िंदगी एक ज़ंग है मगर,

इस दौड़ में अपना ईमान कोई रखना

Wednesday, September 17, 2008

सहरा

कोशिशे बहुत की गुलशन की,
फ़िर भी ज़िन्दगी सहरा है
टूट कर चाहा मैंने उसे,
उससे रिश्ता मिरा गहरा है,
कल तक जो देते थे नसीहत,
आज उन बुजुर्गो पे पहरा है,
गुजरेगी वो भी इसी राह से,
दिल उसे देखने ही तो ठहरा है,

Saturday, September 6, 2008

गम कहते है




गम कहते है हमें यू जुदा न करो ,


हम कहते है मेरे दुःख की दवा न करो,

सज़ा दी है ज़िन्दगी ने हमें,


मगर ख़ुद को हमसे यू खफा न करो,


नही चाहते हो हमें अगर तुम,


तो दिखावे की दुआ न करो,


चंद लम्हों के लिए जिया न करो,


मोहब्बत चाहे न करो,


मगर अपने दिल से दूर भी न करो।